Monday, 18 May 2020

आप कउने गल्ली से हउवा








काशी की गलियों में ही असली बनारसी अंदाज दिखता है .यहाँ की गलियों में इतनी घनी आबादी है की यहाँ तक सूर्य की किरणे भी नहीं पहुंच पति हैं l यहाँ की गलियों के लिए यह कहा जाता है कि अगर आपको इन गलियों की जानकारी ना हो तो इनमें अकेले जाने की गलती ना करें, आप खो सकते हैं l इन गलियों के लिए ऐसा भी कहा जाता है की ये कहीं बंद नहीं मिलती, अगर कहीं बंद हो भी तो उसके आस-पास दूसरा मार्ग जरूर होता है l यहाँ गलियों की संख्या इतनी ज्यादा है कि यहाँ के मुख्य निवासी जिन्हें ‘ खाटी बनारसी ‘ कहा जाता है, से भी पूछिएगा कि आपने काशी की सारी गलियां जानते हैं तो वो भी कहेगा कि नहीं l

काशी में ऐसे तो अनगिनत गलियां हैं, परन्तु उनमें कुछ प्रसिद्ध गलियां हैं ---

काशी गलियों में ही असली काशी है l यहाँ उपस्थित सभी देवी-देवताओं का वास गलियों में है l इन गलियों में कहीं साड़ी की बड़ी-बड़ी गद्दियां हैं, तो कहीं मिठाई की प्रसिद्ध दूकान है l कहीं काशी का प्रसिद्ध मलइयो मिलता है तो कहीं गोलगप्पे और चाट का प्रसिद्ध दूकान है l काशी के लिए ये लाइनें कही जाती हैं —

“गलियों_बीच_काशी_है_कि_काशी_बीच_गलियां,

कि काशी ही गली है कि गलियों की ही काशी है

काशी में ऐसे तो अनगिनत गलियां हैं, परन्तु उनमें कुछ #प्रसिद्ध गलियां हैं ---

🔥1. विश्वनाथ_गली- काशी नगरी के हृदय में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर स्थित है। इस मंदिर के प्रांगण में स्वयं भगवान शंकर ज्योर्तिलिंग के रूप में प्रतिष्ठित हैं। ऐसी मान्यता है कि विश्वनाथ जी के दर्शन से सभी द्वाद्वश ज्योर्तिलिंगों के दर्शन का फल मिलता है। विश्वनाथ जी के नाम पर ही इस गली का नाम विश्वनाथ गली पड़ा। यह काशी की सबसे प्रसिद्ध गली है। यह गली, ज्ञानवापी, चौक से शुरू होकर विश्वनाथ मंदिर होते हुये दशाश्वमेध घाट तक जाती है। विश्वनाथ गली व्यावसायिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण स्थान रखती है। इस गली में कपड़े, श्रृंगार के सामान तथा लकड़ी के बने खिलौने मिलते हैं जो पूरे भारत वर्ष में प्रसिद्ध हैं।

🔥2. कचौड़ी गली- यह गली विश्वनाथ गली के ठीक पीछे स्थित है। इस गली की विशेषता यह है कि यहाँ पर स्थित अधिकांश दुकानें कचौड़ी की हैं। इसी कारण गली का नाम कचौड़ी गली पड़ा। यहाँ दुकानें सुबह से ही खुल जाती हैं तथा बारह बजे रात तक खुली रहती हैं। दुकानदारों में ऐसी मान्यता है कि उनके दुकानों पर भगवान शिव के गण स्वयं कचौड़ी तथा मिठाई खाने आते हैं। यहाँ पर कचौड़ी खाने वालों की भीड़ सुबह सात बजे से शुरू हो जाती है जो कि रात तक जारी रहती है। यह गली भी विश्वनाथ गली की ही तरह घाट के पास निकलती है। इस गली में कचौड़ी के अलावा पौराणिक किताबों, ग्रन्थों तथा बही खातों की दुकानें भी हैं।

🔥3. खोवा_गली- जैसा की नाम से ही प्रतीत हो रहा है कि “खोवा गली” अर्थात् इस गली में खोवा की बहुत बड़ी मण्डी लगती है। खोवा की इतनी बड़ी मण्डी शायद ही भारत के किसी शहर में लगती हो। इसी कारण से इस गली का नाम खोवा गली पड़ गया।

🔥4. ठठेरी (बाजार) गली- यह गली चौक क्षेत्र में स्थित है। इस गली में पहले ठठेरा लोग रहते थे जो बर्तन इत्यादि का निर्माण किया करते थे। आज भी इस गली में पीतल के बर्तन बनते और बिकते हैं। पीतल के बर्तन व उससे बने सामानों का सबसे बड़ा बाजार इस गली में है। गली में अन्दर जाकर भारत के युग निर्माता तथा प्रसिद्ध कवि भारतेन्दु हरिश्चन्द्र जी का निवास तथा उससे कुछ दूरी पर अग्रसेन महाजनी पाठशाला है।

🔥5.दालमण्डी गली- यह गली काशी के दो महत्वपूर्ण बाजार चौक तथा नई सड़क को आपस में जोड़ती है। इस गली में कपड़े-जूते-चप्पल तथा इलेक्ट्रानिक्स की दुकानें तथा श्रृंगार की वस्तुएँ थोक में मिलती हैं। राजाओं-महाराजाओं के समय में इस गली में नृत्यांगनायें रहा करती थीं जिनके यहाँ नृत्य, संगीत का आनन्द लेने के लिये नगर के धन्ना सेठ जाया करते थे। लखनऊ की प्रसिद्ध नृत्यांगना उमराव-जान लखनऊ छोड़कर दालमण्डी में बस गयीं थीं, उनका अन्तिम समय यहीं व्यतीत हुआ। काशी में ही उनकी कब्र आज भी स्थित है।

🔥6. नारियल (बाजार) गली- यह गली चौक थाना के ठीक पीछे है जो दालमण्डी गली में आकर मिलती है। इस गली में नारियल, विवाह से सम्बन्धित सामान बिकते हैं। नारियल की बड़ी मण्डी होने के कारण इस गली का नाम नारियल बाजार पड़ा।

🔥7. घुंघरानी गली- यह गली दालमण्डी से निकली है तथा दालमण्डी और काशी के मुख्य बाजार बाँसफाटक को आपस में जोड़ती है। इस गली में भी इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकानें हैं।

🔥8.गोविन्दपुरा गली- यह गली चौक क्षेत्र में है तथा चौक मजार से पहले अवस्थित है। इसमें सोने-चाँदी के आभूषण, रत्न इत्यादि की दुकानें हैं। यह गली चौक, नारियल बाजार, रेशम कटरा को आपस में जोड़ती है।

🔥9. रेशम_कटरा गली- यह गली गोविन्दपुरा गली की मुख्य शाखा है। इसमें भी सोने-चाँदी के आभूषण की दुकाने हैं। यहाँ सोने-चाँदी के आभूषणों का निर्माण किया जाता है।

🔥10. विन्ध्यवासिनी गली- इस गली को विन्ध्याचल की गली भी कहा जाता है। इस गली में विन्ध्याचल माता का मंदिर है जो मिर्जापुर में स्थित विन्ध्याचल मंदिर की प्रतिमा का प्रतिरूप है। इस कारण मंदिर को विन्ध्वासिनी मंदिर कहा जाता है जिसके नाम पर इस गली का नाम विन्ध्यवासिनी गली पड़ा। यह गली काशीपुरा क्षेत्र से शुरू होती है तथा रेशम कटरा में जाकर मिलती है।

🔥11. कालभैरव गली- यह गली विश्वेश्वरगंज क्षेत्र में है। यह भैरोनाथ चौराहा से आरम्भ होकर कालभैरव मंदिर तक फैली है। कालभैरव जी काशी के कोतवाल हैं जो भगवान शंकर के प्रधान सेनापति हैं। ऐसी मान्यता है कि काशी में कोई व्यक्ति तभी निवास कर सकता है जब कालभैरव जी की अनुमति मिलती है। कालभैरव जी के नाम पर इस गली का नाम कालभैरव गली पड़ा। यहाँ स्थित मोहल्ले का नाम भैरवनाथ है।

🔥12. भूतही इमिली की गली- यह गली मैदागिनी क्षेत्र में स्थित टाउनहाल मैदान के पीछे है। यह मालवीय मार्केट से आरम्भ होकर भैरोनाथ क्षेत्र तक जाती है। कहा जाता है कि इस गली में इमली का पेड़ था जिस पर भूत तथा चुड़ैल निवास करती थी जिसकी वजह से लोग इधर से गुजरने में डरते थे। परन्तु अब ऐसी कोई बात नहीं है। किन्तु पहले जो नाम था वही आज भी है।

🔥13. सप्तसागर गली- यह गली मैदागिन क्षेत्र में है तथा टाउनहाल मैदान के गेट के ठीक सामने से शुरू होती है तथा नखास की ओर निकलती है। इस गली में पूर्वांचल की सबसे बड़ी दवा मण्डी है।

🔥14. आसभैरव गली- यह गली नीचीबाग क्षेत्र में है। आस-भैरव के मन्दिर के नाम पर इस गली का नाम आसभैरव गली पड़ा। इस गली में सिक्खों का पवित्र गुरुद्वारा स्थित है।

🔥15. कर्णघंटा गली- यह गली कर्णघंटा क्षेत्र में पड़ती है। कर्णघंटा से शुरू होकर रेशम कटरा तक जाती है। यहीं पर विन्ध्यवासिनी गली भी आकर मिलती है। कर्णघंटा क्षेत्र में छपाई व कागज सम्बन्धित सभी सामानों का बहुत बड़ा मार्केट है।

🔥16. गोला दीनानाथ गली- गोला दीनानाथ गली में पूर्वांचल की सबसे बड़ी मसाले की मण्डी है। यह कबीरचौरा क्षेत्र में स्थित है। इस मण्डी में भगवान दीनानाथ का मन्दिर होने से इसका नाम गोला दीनानाथ पड़ा तथा इस मण्डी में आने वाली सभी गलियों को गोला दीनानाथ की गली के नाम से जाना जाता है। इस मण्डी के चारों तरफ गलियाँ हैं।

🔥17. गोपाल मंदिर की गली- यह गली बुलानाला क्षेत्र से प्रारम्भ होकर गोपाल मंदिर तक जाती है। इस मन्दिर में गोपाल जी की अष्टधातु निर्मित प्रतिमा है। ऐसी मान्यता है कि इस प्रतिमा की पूजा महारानी कुन्ती करती थीं। यह प्रतिमा महारानी कुन्ती द्वारा स्थापित की गई है। जन्माष्टमी के समय इस मन्दिर तथा गली को दुल्हन की भाँति सजाया जाता है।

🔥18. पत्थर गली- काशी में पत्थर की गली दो क्षेत्र में है। एक जतनबर की पत्थर गली तथा दूसरी चौक क्षेत्र की पत्थर गली। चौक क्षेत्र की पत्थर गली में सभी मकान पत्थर के थे, इसलिये उसका नाम पत्थर गली पड़ा तथा जतनबर की पत्थर गली में पत्थर का गेट बना था जिसके कारण उसका नाम पत्थर गली पड़ा। अब पत्थर का गेट नहीं है।

🔥19. हनुमान गली- यह गली हनुमान घाट से प्रारम्भ होकर अस्सी तथा गोदौलिया मार्ग को आपस में जोड़ती है। हनुमान घाट के निर्माण के साथ ही इस गली का निर्माण हुआ। हनुमान घाट के नाम पर गली का नाम हनुमान गली पड़ा।

🔥20. तुलसी गली- यह गली अस्सी क्षेत्र में पड़ती है। गोस्वामी तुलसीदास के नाम पर इस गली का नाम तुलसी गली पड़ा। गोस्वामी तुलसीदास जी की मृत्यु इसी गली में हुई थी।

🔥21. गुदड़ी गली- इस गली में “बड़ा गुदड़ जी” तथा “छोटा गूदड़ जी” के नाम के दो प्रसिद्ध अखाड़े थे। इनका निर्माण अट्टारहवीं शताब्दीं में हा था। ये अखाड़े आज भी वहाँ पर अवस्थित है। इन्हीं अखाड़ों के नाम पर ही इसका नाम गुदड़ी गली पड़ा। यह गली तुलसी गली से ही निकली है।

🔥22. शिवाला गली- यह गली शिवाला घाट से आरम्भ होती है तथा शिवाला घाट को मुख्य मार्ग से जोड़ती है। शिवाला घाट के नाम पर ही इस क्षेत्र का नाम शिवाला पड़ गया तथा इस गली का नाम शिवाला गली पड़ा।

🔥23. खिड़की गली- यह गली खिड़की घाट से प्रारम्भ होती है। खिड़की घाट का निर्माण बैजनाथ मिश्र ने करवाया था। यह घाट लगभग दो सौ वर्ष पुराना है। अतः गली भी उतनी ही पुरानी है।

🔥24. जुआड़ी गली- ऐसा कहा जाता है कि प्रसिद्ध जुआड़ी नन्द दास ने जुए की एक दिन की कमाई से इसे बनवाया था। इसलिये इस गली का नाम जुआड़ी गली पड़ा। यह गली अब विलुप्त हो चुकी है।

🔥25. ढुंढीराज गली- यह गली चौक क्षेत्र के ज्ञानवापी से आरम्भ होती है तथा दण्डपाणि भैरव मन्दिर तक जाती है। इस गली में गणेश जी का मन्दिर है जो गणनाथ विनायक के नाम से जाने जाते है।

🔥26. संकठा गली- यह गली संकठा घाट से आरम्भ होती है। गली में संकठा देवी का प्रसिद्ध मन्दिर है जिसका निर्माण गोहनाबाई ने करवाया था। संकठा देवी नाम पर ही गली का नाम संकठा गली पड़ा तथा घाट का नाम संकठा घाट पड़ा। संकठा देवी के मन्दिर के बगल में ही कात्यायनी देवी का भी मन्दिर है। यह गली विश्वनाथ गली से आकर मिलती है।

🔥27. पशुपतेश्वर गली- यह गली चौक क्षेत्र से आरम्भ होकर रामघाट तक जाती है। इस गली में पशुपतेश्वर महादेव का मन्दिर है। उन्हीं के नाम पर इस गली का नाम पशुपतेश्वर गली पड़ा।

🔥28. पंचगंगा गली- पंचगंगा घाट के नाम पर इस गली का नाम पंचगंगा गली पड़ा। ऐसी मान्यता है कि पंचगंगा घाट पर पाँच नदियों का संगम होता है। गंगा, जमुना, सरस्वती के अलावा दो नदियाँ “सुकिरणा” जो भगवान सूर्य की प्रतिमा से निकलती है तथा “धूतपापा” जो घाट पर ही जमीन से निकली है। पाँच नदियों के संगम के कारण इस घाट का नाम पंचगंगा घाट पड़ा। ऐसा पुराणों में वर्णित है कि स्वयं तीर्थराज प्रयाग गंगा दशहरा के दिन अपने पाप धोने इसी घाट पर आते हैं। यही गली पंचगंगा घाट से आरम्भ होकर ब्रह्माघाट, दुर्गाघाट, राजमन्दिर, गायघाट, त्रिलोचन घाट, प्रहलाद घाट की गलियों को आपस में जोड़ती है। यह गली बहुत बड़ी तथा प्रसिद्ध है।

🔥29. चौरस्ता गली- यह गली गायघाट से प्रारम्भ होती है और त्रिलोचन घाट, तेलियानाला होते हुये चौखम्भा तक जाती है। चौखम्भा में बीबी हटिया की पतली गली में मिलती है।

🔥30. नेपाली गली- सुप्रसिद्ध नेपाली मन्दिर के नाम पर ही इस गली का नाम नेपाली गली पड़ा। यह विश्वनाथ गली तथा ललिता घाट को आपस में जोड़ती है। नेपाली मन्दिर के नाम पर ही इस मोहल्ले का नाम नेपाली खपड़ा पड़ा।

🔥31. सिद्धमाता गली- यह गली मैदागिन क्षेत्र के गोलघर में स्थित है। यह गोलघर को बुलानाला मुख्य मार्ग से जोड़ती है। इस गली में सिद्धमाता देवी का मन्दिर है।

🔥32. कामेश्वर महादेव गली- यह गली मच्छोदरी पर बिड़ला हॉस्पिटल के सामने से प्रारम्भ होती है जो कामेश्वर महादेव मन्दिर तक जाती है।

🔥33. त्रिलोचन_महादेव गली- यह गली गायघाट से प्रारम्भ होकर त्रिलोचन महादेव मन्दिर तक जाती है तथा कामेश्वर महादेव गली से आपस में मिलती है।

🔥34. पाटन_दरवाजा_गली- यह गली गायघाट से शुरू होकर बद्री नारायण घाट तक जाती है।

🔥35. भार्गव_भूषण_प्रेस_वाली_गली- मच्छोदरी स्थित भार्गव भूषण प्रेस को मच्छोदरी मुख्य मार्ग से जोड़ती है। इसलिए इस गली को भार्गव भूषण प्रेस वाली गली कहते हैं।

🔥36. लट्ट_गली- यह गली जतनबर में स्थित है तथा गणेश गली को आपस में जोड़ती है।

🔥37. नइचाबेन_गली- यह गली कोयला बाजार से प्रारम्भ होकर बहेलिया टोला तक जाती है।

🔥38. नचनी_कुआँ_गली- यह गली भी कोयला बाजार से प्रारम्भ होकर भदऊ चुँगी तक जाती है।

🔥39. चित्रघंटा_गली- यह गली चौक क्षेत्र से प्रारम्भ होकर रानी कुआँ तक जाती है तथा इस गली में चित्रघंटा माता का मन्दिर स्थित है।

🔥40. गढ़वासी_टोला_गली- यह गली चौखम्भा से प्रारम्भ होकर संकठा की गली में जाकर मिलती है।

🔥41. भारद्वाजी_टोला_गली- यह गली प्रहलाद घाट से प्रारम्भ होकर भदऊ चुँगी तक जाती है।

🔥42. हाथी_गली- यह गली बीबी हटिया की गली से प्रारम्भ होकर दादुल चौक होते हुए ब्रह्मा घाट तक जाती है।

🔥43. कातरा_गली- यह गली राजमन्दिर क्षेत्र में पड़ती है। यह अत्यन्त छोटी गली है इस गली में केवल 4 से 5 मकान ही पड़ते हैं। यह गली एक तरफ से बन्द है।

🔥44. चौखम्भा_गली- यह गली चौखम्भा क्षेत्र से शुरू होकर ठठेरी बाजार की गली में आकर मिलती है।

🔥45. सुग्गा_गली- सुग्गा गली ठठेरी बाजार से प्रारम्भ होकर रानी कुआँ तक जाती है। इस गली पर सिन्नी टुल्लु का पहला कारखाना था।

🔥46. गोला_गली- ठठेरी बाजार स्थित भारतेन्दु भवन के पीछे की गली को गोला गली के नाम से जाना जाता है। यह गली ठठेरी बाजार की मुख्य गली से निकली है।

🔥47. ननपटिया_गली- नन अर्थात छोटी जाति के लोग इस गली में रस्सी तथा जूट से बने बोरे की सिलाई करते हैं जिसके कारण इस गली को ननपटिया गली कहते हैं। यह गली विश्वेश्वरगंज क्षेत्र में पड़ती है।

🔥48. नरहर_पुरा_गली- नरहेश्वर महादेव के नाम पर इस गली का नाम नरहर पुरा गली पड़ा। यह गली डी0ए0वी0 रोड से प्रारम्भ होकर नरहरेश्वर महादेव मन्दिर तक जाती है। विवादित होने की वजह से इस मन्दिर को बन्द कर दिया गया है। यह अब श्री शिव प्रसाद गुप्त अस्पताल में स्थित है।

🔥49. अगस्त_कुण्डा_गली- यह गली गौदोलिया तांगा स्टैण्ड के पास से प्रारम्भ होकर दशाश्वमेध घाट तक जाती है।

🔥50. मीरघाट_गली- यह गली मीरघाट से प्रारम्भ होकर दशाश्वमेध तक जाती है।

🔥51. मणिकर्णिका_गली- यह गली मणिकर्णिका घाट से प्रारम्भ होकर कचौड़ी गली में आकर मिलती है। इसके अलावा इस गली की अन्य शाखायें सिंधिया घाट तथा दशाश्वमेध घाट तक जाती हैं। ऐसा कथानक है कि शिवजी जब माता सती को लेकर इधर से गुजरे तो उनके कान की मणि इस घाट पर गिर पड़ी थी। जिस कारण इस घाट का नाम मणिकर्णिका और गली का नाम मणिकर्णिका गली पड़ी।

🔥52. शवशिवा_काली_गली- यह गली सोनारपुरा में स्थित बंगाली टोला इण्टर कालेज के सामने से प्रारम्भ होती है तथा पाण्डेय घाट तक जाती है। इसी गली में “शव शिवा काली” जी का प्रसिद्ध मन्दिर स्थित है।

🔥53. बड़ा_गणेश_वाली_गली- यह गली लोहटिया क्षेत्र से प्रारम्भ होकर बड़ा गणेश मन्दिर तक जाती है। इस गली में गणेश जी का प्रसिद्ध मन्दिर है। उन्हें दंत हस्त विनायक या बड़ा गणेश के नाम से जाना जाता है। उन्हीं के नाम पर इस मोहल्ले का नाम बड़ा गणेश पड़ा। इस गली की अन्य शाखायें नवापुरा होते हुए दारानगर तथा हरिश्चन्द्र इण्टर कालेज के पीछे से होते हुए हरिश्चन्द्र डिग्री कालेज तक जाती है।

🔥54. कुंज_गली- कुंज गली रानी कुआँ से प्रारम्भ होकर कचौड़ी गली में जाकर मिलती है। इस गली में विश्व प्रसिद्ध बनारसी साड़ियों की गद्दियाँ हैं।

🔥55. भूलेटन_गली- यह गली भूलेटन क्षेत्र से प्रारम्भ होकर दालमण्डी की गली से होते हुए घुघरानी गली के प्रारम्भ पर जाकर मिलती है।

Tuesday, 28 April 2020

माय लास्ट डे इन बनारस-अ लेटर टू दी होली सिटी वाराणसी।




प्रिय बनारस,

6 जून, 2017 ये केवल एक तारीख नहीं है। एक तरफ यह वो दिन है जब मैं यहाँ पर आखिरी बार हूँ, वहीं दूसरी तरफ यह एक नई शुरुआत लिए हुए हैं। एक तरफ तीन बरस का सुनहरा अतीत है और एक तरफ बेहतर भविष्य की योजनाएं हैं। जब मैं यहां आया था तो बस अपनी पढ़ाई का एक हिस्सा पूरा करने आया था...और...और ये आज पूरा हो चुका हैं, इसके लिए खुश हूँ।
तो फिर ऐसा क्या है जो ये सब लिखनें को मजबूर कर दे रहा???

इसके पीछे कोई एक वजह नहीं बल्कि वजहों का पूरा समूह है और वो समूह है...तुम....बनारस।
बनारस तुम मेरे लिए बस एक शहर नहीं हो। तुममें शामिल है यहाँ के घाट जिनके साथ मैंने अपना सुख-दुख, प्यार-दर्द, हंसना-रोना, सफलता-असफलता सबकुछ साझा किया है।
प्यार भी यहीं मिला हैं तो कभी दिल भी यहीं टूटा हैं।
सैकड़ो लोगो की भीड़ से घिरा यहाँ पर नुक्कड़ भी किया है,वहीं बहुत बार घाट की सीढ़ियों पर बैठकर सारी रात अकेले ही गुजार दी हैं।

तुममें शामिल है कुछ बेहतरीन और प्यारे लोग जिनसे मैं यहीं पर मिला और उनका होकर रह गया। ये लोग बनारस के ही हैं या मेरी ही तरह यहाँ पर एक छात्र के रूप में आये थे। अगर ये लोग न होते यहाँ तो मैं कभी तुम को अपना दूसरा घर नहीं कह पाता।

तुममें शामिल है लंका जो अड्डा हैं , विश्वविद्यालय परिसर जो मेरे लिए स्वर्ग है, जहाँ सुबह शांत और शाम खूबसूरत होती है; और इसी परिसर में शामिल हैं, ओमकार नाथ ठाकुर प्रेक्षागृह,जहाँ से मैंने रंगमंच के बारें में सीखना शुरू किया; विश्वनाथ मंदिर,जहाँ भोलेनाथ से डाइरेक्ट बात होती थी; बिरला हॉस्टल, वो जगह जहाँ दिनभर हर जगह भटकने के बाद थक-हारकर रात में आते तो ऐसा लगता घर आ गए हों; केंद्रीय पुस्तकालय, जहाँ मेरा सबसे ज्यादा समय गुजरा; कला संकाय, मधुबन,और महिला महाविद्यालय।

तुम में शामिल हैं सारनाथ वह जगह जो बुद्ध और मुझे और करीब ले आया; नागरी नाटक मंडली, इस जगह का महत्व रंगमंच से जुड़े लोग मुझसे बेहतर जानते हैं, स्पंदन,सरस्वती पूजा,कृष्ण-जन्मआष्ट्मी, मालवीय जयंती, सुबह-ए-बनारस, गंगा आरती,घाट-संध्या, शिवरात्रि, होली और तुम्हारी संकरी-लंबी गलियाँ। यहीं सब मिलकर एक वजह बनते है,जिसे कहते हैं......बनारस।

तो इस आखरी दिन की शुरुआत हुई बारिशों की बूंदों से, जिस वक़्त हम फ्रेंच भाषा का पेपर दे रहें थे। लेकिन पेपर से ज्यादा ध्यान हॉस्टल में खुले में सूख रहे कपड़ो का था तो जल्दी पेपर खत्म करके भागे बारिश में ही.....और इसका मजा ही कुछ और होता है। उसके बाद शुरू हुई सबसे भयानक प्रक्रिया जिसे नो ड्यूस कहा जाता है। बारिश और यह दोनो ही अगले तीन घंटो तक साथ-साथ चलते रहे। और इसी बीच vt के छोले-समोसे और चाय भी चलते रहे......और चलती रही एक बाइक जिसपे मैं और शिवम् चौबे इस बारिश में पूरा कैम्पस नाप रहे थे।

आखिरकार बारिश खतम हुई और और नो ड्यूस भी पूरा हुआ। उसके बाद सबकुछ समेटने और कुछ बैग्स में भरने का सिलसिला शुरू हुआ। फिर कुछ मित्र ऐसे भी थे मुझसे भी पहले जाने को थे, तो उन्हें छोड़ के आया लंका तक और फिर खुद के जाने की तैयारी करने लगा। शाम को अचानक से सबकुछ मोह-माया लगने लगा। दिल और दिमाग में जंग चलने लगी। दिमाग से सोचा तो समझ में आने लगा की ये सब जिंदगी का एक हिस्सा हैं लेकिन सिर्फ हिस्सा ही हैं पूरी ज़िन्दगी नहीं। दिल कह रहा था कि....अरे ऐसा भी क्या है फ़ेसबुक, व्हाट्सएप्प तो है ही सब से बात करने के लिए और अभी जा रहे तो क्या साल में दो बार तो पक्का ही बनारस आएंगे।

खैर....रात का भोजन मोर्वी हॉस्टल में किया और निकल पड़े मैं,शिवम् और उत्कर्ष अस्सी घाट इस दिन को और बेहतर और यादगार बनाने के लिए। वहाँ ठंडी-ठंडी हवा बह रही थी,सबकुछ शांत लग रहा था। पर ये शांति हमें आज मंजूर ना थी.....तो उत्पात मचाने हम तीनों कूद गए गंगाजी में, और जब थक गए तो लौट आये वापस अपने हॉस्टल। इन सबके बाद रातभर बातचीत का दौर चलता रहा और साथ ही पैकिंग भी होती रही। रात के आखरी पहर में जब सब कुछ वीराना और चुप सा था........मैं भी चुपचाप सो गया। आखरी पलों में खामोशी ही सबसे ताक़तवर भाषा होती है शायद। इसीलिए मैं,तुम, दोस्त सब खामोश थे।

और जिस तरह तीन साल पहले मैं एक सुबह अचानक इस शहर में चुपके से आ गया था। उसी तरह अचानक एक सुबह चुपके से चला भी गया। बिना किसी से मिले.... क्योंकि जाते हुए मिलना दु:खद होता है।
और.........इस समय जब मैं यह सब लिख रहा हूँ, तब ट्रेन में हूँ जो दौड़ रही हैं मेरे गावँ की तरफ।
सबकुछ तेजी से पीछे छूट रहा है...पेड़,इमारतें,बी एच यू ,घाट,लंका,दोस्त,प्यार,और तुम भी पीछे छूट रहें हो बनारस....!

और बस बाकी रह गया है ये पेड़,इमारतें,बी एच यू ,घाट,लंका,दोस्त,प्यार.....और तुम बनारस।

अलविदा बनारस।






Banaras Talks - मैं बनारस हूं, मैं काशी हूं।


कुछ तो बात है यहां, 

जो सबसे ख़ास है यहां,
यूहीं नहीं ये शहरों में श्रेष्ठ है,
कुछ है,
जो जीवन और मरण दोनों ही इतने पास हैं यहां,
तो चलो सुनते हैं,जानते हैं,
कि कौन सा है ये शहर,
जहां हर हर महादेव ही है तीनों प्रहर,
सुबह जहां हसीन, शामें रंगीन है,
सुनते हैं उस शहर की कहानी,
उसी की जुबानी,
जहां हर मौसम खुद में आफ़रीन है।

" मैं अनगिनत मंदिरों का वास हूं,

महादेव के अक्खड़पन का अहसास हूं,
गंगा का निर्मल पानी हूं,
शंखों के उद्घोष की वाणी हूं,
हूं अस्सी घाट की भीड़ मैं,
दशाश्वमेध की आरती सा संस्कारी हूं,
हूं पान की वो मिठास मैं,
हूं सुबह सुबह चाय की अड़ि पे
लगने वाली वो अट्टहास मैं,
बाबा कालभैरव सा मैं अविनाशी हूं,
मैं बनारस हूं, मैं काशी हूं। 

हूं वरुना- अस्सी का मेल मैं,

हूं गिल्ली डंडे का खेल मैं,
मैं गलियों का तांता हूं,
बचपन में दूरदर्शन पे आती
वो रहस्यमई चंद्रकांता हूं,
मैं सफ़र की शुरुआत हूं,
हूं सफ़र का अंत भी,
नादान हूं मैं बालक सा,
हूं मैं ज्ञानी महंत भी,
मैं महादेव का चिलम हूं,
राबी चेनाब झेलम हूं,
सिगरा रथयात्रा का जाम हूं,
टक्साल सा सिनेमा हॉल हूं,
मैं हिन्दू धर्म का वरदान हूं,
खुद में समेटे पूरा हिन्दुस्तान हूं,
विश्वनाथ मन्दिर की वो अद्वितीय नक्काशी हूं,
मैं बनारस हूं, मैं काशी हूं। 

मैं महामना की देन हूं,

गंगा किनारे मिलता है जो,
वो असीम चैन हूं,
BHU सा ज्ञानी हूं,
UP कॉलेज सा अभिमानी हूं,
बिग बाज़ार की महंगाई हूं,
२०० में मिलती गदोलिया की वो सुंदर साड़ी हूं,
मैं मोदी वाजपेई सा प्रत्याशी हूं,
राहुल प्रियंका केजरीवाल सा दो दिन का मैं प्रवासी हूं,
हूं ट्रामा सेंटर सा जीवनदाई मैं,
हूं कवियों में चंद्रवरदाई मैं,
मैं आस्था का केंद्र हूं,
जीता जागता महेंद्र हूं,
कबीर नगर के शिक्षण का मैं रस हूं,
मैं CHS, Origence, JRS हूं,
दुर्गाकुंड के छात्रों सा आत्मविश्वासी हूं,

मैं बनारस हूं, मैं काशी हूं।